वक्त का छूटता साथ > > > > >

सोमवार, 20 जून 2011

इतना फॉरवर्ड करो कि आंदोलन बन जाए...


FORTUNE FAVORS THE BOLD........................." लेकिन कुछ होगा नहीं क्यूंकि भारतीय खुद ही नहीं चाहते के ये सब ख़त्म हो! साउथ में पब्लिक ने उस पार्टी को बिल्कुल उखाड़ फेंका जिसके खिलाफ 1000 रूपये का भी भ्रष्टाचार का आरोप नहीं हैउसकी जगह कांग्रेस को जीत हांसिल हुई! जब हम ही नहीं चाहते तोह हम चिल्लाते क्यों हैं ?

दर्द होता रहा छटपटाते रहे,
आईने॒ से सदा चोट खाते रहे, 
वो वतन बेचकर मुस्कुराते रहे 
हम वतन के लिए॒सिर कटाते रहे 


280 लाख करोड़ का सवाल है ...

"भारतीय गरीब हैं लेकिन भारत देश नहीं" ऐसा मानना है स्विस बैंक के डायरेक्टर का.... उनका ये भी कहना है कि भारत का लगभग 280 लाख करोड़ स्विस बैंक में जमा है। ये रकम इतनी अधिक है कि भारत के आने वाले तीस सालों का बजट बिना टैक्स के बनाया जा सकता है। या यूं भी कह सकते हैं कि भारत के किसी भी गांव से दिल्ली तक 4 लेन रोड बनाई जा सकती है। ऐसा भी कह सकते हैं कि 500 से अधिक सामाजिक प्रोजेक्ट पूरे किए जा सकते हैं।  

ये रकम इतनी अधिक है कि हर भारतीयों को 2000 रुपये हर महीने दिए जाएं तो 60 साल तक खत्म ना हो। जरा सोचिए...हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और नौकरशाहों ने कैसे देश को लूटा है। और ये लूट का सिलसिला अभी तक बदस्तूर जारी है। इस सिलसिले को अब रोकना बहुत जरूरी हो गया है। अंग्रेजों ने हमारे देश पर करीब 200 साल तक राज किया और सोने की चिड़ियां कहे जाने वाले भारत देश को कंगाल कर दिया...अंग्रेज तो भारतीय नहीं थे और ना ही उन्हें भारत देश से कोई लेना-देना था और उन्होंने 200 साल के राज में करीब 2 लाख करोड़ रुपये लूटे। लेकिन आजादी के केवल 64 सालों में हमारे देश के भ्ष्ट राजनेता और नौकरशाह 280 करोड़ रुपये लूट चुके हैं।

एक तरफ 200 साल में 2 लाख करोड़ तो दूसरी तरफ 64 सालों में 280 लाख करोड़। यानि हर साल का लगभग 4.37 लाख करोड़ या हर महीने करीब 36 हजार करोड़ भारतीय मुद्रा स्विस बैंक में इन भ्रषट लोगों द्वारा जमा करवाई गई है। इस हिसाब से भारत को किसी भी वर्ल्ड बैंक से लोन की कोई जरूरत नहीं है। सोचो कि कितना पैसा हमारे भ्रषट नेताऔं और उच्चअधिकारियों ने ब्लॉक करके रखा हुआ है।
हमें इन भ्रष्ट नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ जाने का पूर्ण अधिकार है हाल ही में हुए घोटालों के बारे में सभी जानते हैं-CWG घोटाला, 2जी घोटाला, आदर्श हाउसिंग घोटाला...और भी ना जाने कौन-कौन से घोटाले अभी उजागर होने बांकी हैं। हम सभी लोग जोक्स फॉरवर्ड करते ही हैं...क्यों इस बार बिना किसी मैसेज बाउचर के डलवाए अपने फ्री जीमेल या फिर फेसबुक के जरिए इसे फॉरवर्ड करें और इतना फॉरवर्ड करें कि इसे पूरा भारत पढ़े और ये एक आंदोलन बन जाए....

फेसबुक आज हमारे जीवन का (शायद) एक महत्तवपूर्ण हिस्सा बन गया है। मनोरंजन के तौर पर भी और एक दूसरे से जुड़ने के तौर पर भी। साथ ही इसने हमारे देश में अन्ना हजारे के उस आंदोलन को (जिसने देश के कलमाड़ी और राजा जैसे लोगों को सामने लाने में मदद की) इतना बढाया कि सत्ता में बैठे लोगों के तख्त को डांवाडोल कर दिया और सरकार को लोकपाल बिल के बारे में पुनर्विचार करने को मजबूर कर दिया जो ना जाने कितने सालों से ठंडे बिस्तर में पड़ा हुआ था।

ऐसे ही आज  ना जाने किसने और कहां से इस आर्टिकल... या यूं कहूं कि अपने मन के गुबार को बाहर निकाला है जो शायद हम सभी के अंदर है...जिस तरह हमारी ही तरह के एक आम आदमी ने gmail  बुक के जरिए अपने इस गुबार को बाहर निकाला है उसी तरह हम सभी को भी इसे आगे बढाने में मदद करनी चाहिए। शायद आप सभी सोचें कि इससे होगा क्या लेकिन ये ना भूलें कि बैंगलोर में हुए उस पब कांड का विरोध इंटरनेट के जरिए पिंक चड्डी अभियान के रुप में ही एक आम आदमी ने किया था जो धीरे-धीरे एक आंदोलन बन गया था।  


शुक्रवार, 10 जून 2011

Run Baba run Delhi Police peeche hai



संसद से लेकर सड़क तक आज सभी जगह फैले भ्रष्टाचार से आम आदमी (आम मतलब वो जो घूस नहीं दे सकता है जिसमें थोड़ा ईमानदारी है) कुपित है। और देश के हजारों युवा इस आंदोलन को मज़ाक और हंसी का मुद्दा बना रहे हैं इस फोटो के जरिए जिसे लगभग हर रोज हजार से ज्यादा युवा like करते हैं।

5 अप्रैल को शुरू हुए अन्ना के अनशन में लगभग 70 से 80 प्रतिशत युवा शामिल थे। युवा यानि आने वाले समय में लोकतंत्र की डोर थामने वाले लोग। उस समय युवाओं ने फेसबुक ट्वीटर फोन और मिस कॉल के जरिए देश को हजारों लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा किया था। और शायद उसी समय सत्ता में बैठे लोगों को देश की युवा ताकत के बारे में अंदाजा हुआ था।

आज उसी रह बाबा रामदेव भी देश में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे हैं। लेकिन युवाओं ने उनके इस आंदोलन को फेसबुक में हंसी का पात्र बना दिया है। क्या अन्ना हज़ारे की तरह बाबा का आंदोलन भी देश के लिए नहीं है? शायद सभी लोगों का जवाब होगा नहीं...क्योंकि अन्ना हजारे निस्वार्थ भाव से देश सेवा में और देश के लिए आंदोलन कर रहे थे और बाबा के आंदोलन में राजनीति के साथ ही लालच की बू आती है। इसलिए शायद उनके आंदोलन में हजारों लोगों के होने के बाद भी युवाओं की उतनी संख्या नहीं है जितनी अन्ना के आंदोलन में थी।

बाबा और अन्ना की तुलना किसी भी कीमत में नहीं की जा सकती है लेकिन फिर भी जब देश का सवाल हो तो उसमें सभी को साथ खड़े होना ही होगा क्योंकि हम सभी जानते हैं कि देश में भ्रष्टाचार इतनी बुरी तरह से फैल चुका है कि उसके लिए हमें ही कुछ करना होगा। और इसके लिए युवाओं का समर्थन बहुत जरूरी है। मैं बाबा का समर्थन नहीं कर रही हूं ना ही मेरा अन्ना हजारे से कोई खास लगाव है लेकिन फिर भी मुझे अपने देश से शायद प्यार है या फिर मेरे जैसे मीडिल क्लास के लोग यही चाहते होंगें कि हमें घूस देने से छुटकारा मिले।

एक संस्थान में काम करते हुए अन्ना के अनशन के समय जब मैंने अपने एक सीनियर से पूछा था कि इस अनशन से कुछ होगा तो उन्होंने मुझसे कहा  जब आरटीआई बन रहा था तो लोग उससे कई उम्मीदें रखे हुए थे हांलाकि सारी पूरी नहीं हुई पर कुछ तो हुई। इस आंदोलन से भी चाहे 50 प्रतिशत ही सही मिलेगा तो सही। तो मुझे समझ में आया कि हर चीजें से सभी अच्छा ही अच्छा नहीं मिलता कुछ खराब भी मिलेगा।

लेकिन बाबा के इस आंदोलन को देश के युवा फेसबुक पर हंसी का मुद्दा बना रहे हैं। इतना ही नहीं बाबा को जहां इस फोटो में शोले के अभिनेता जय के रूप में दिखाया जा रहा है तो वहीं अन्ना हजारे को वीरू के तौर पर। हमें शर्म आनी चाहिए कि आज से एक दो महीने पहले हम जिस अन्ना को देश का नेता समझ रहे थे आज उनके साथ इतना भद्दा मजाक कर रहे हैं। हमें ये समझना चाहिए कि अन्ना के उसी आंदोलन की बदौलत आज राजा कनिमोझी जैसे कई भ्रष्टाचारी जेल की हवा खा रहे हैं। और ऐसे लोगों पर सरकार ना चाहते हुए भी शिकंजा कस रही है।

और उन्हीं की बदौलत भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठी थी। ऐसा नहीं है कि हम उससे अनजान थे पर आवाज़ उठाने की हिम्मत किसने की उस बूढे कंधों ने। एक ऐसे साधारण आदमी ने जो आँखों में मोटा चश्मा, गांधी टोपी लगाए थे। जिसके पास अपना कुछ नहीं था जो देश को ही अपना घर मानता है और हम आज उन्हीं के साथ मजाक कर रहे हैं।


क्यों हममें इतनी हिम्मत नहीं थी कि हम भी अन्ना की तरह आवाज उठा पाते क्या हम कर पाते वो सब जो अन्ना ने किया? नहीं ना फिर क्यों आज हम युवा ऐसा मजाक कर रहे हैं।


माना कि बाबा के आंदोलन से सब कुछ ठीक होगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ रातों-रात कानून बन जाएगा और अगर कानून बन भी गया तो उससे भ्रष्टाचारी पकड़े जाएंगें। विदेशों से काला धन वापस आ जाएगा, लेकिन फिर भी कुछ तो होगा। कुछ तो क्योंकि हर चीज से सब कुछ अच्छा नहीं मिलता कुछ बुरा भी मिलता है। और हमें भी इस आंदोलन से कुछ ना कुछ जरूर मिलेगा। और हमें फेसबुक पर 

Lmao
haha... best frnds.. :P lol :P
ya...:P
thanx 4 tag
lolz
lolx ty 4 tag
Nice bhai.......
Dhoom machale....
-i have shared it ....superlike!!!
-Hehe.. Nice..
-Hahahaha nice Jodi no wonder kya Karengeh 
-hahahaha,nice 1
-nice one....,
-Ye dosti,hum nai...hmm hm hmm
-Cul...!
-baba.........................karne se hogaa!!!!
-ab yeh thodi ki baba ne kar liya aur hogaya, khud bhi toh karo...

ये सब लिखने की जगह कुछ और करना चाहिए। क्योंकि जब हम उन्हें वहां जाकर सपोर्ट नहीं कर पा रहे हैं तो फेसबुक के जरिए ही सही पर सपोर्ट करें। क्योंकि मिस्र में युवाओं ने ही एक क्रांति लाई थी और हमें भी अपनी ताकत के जरिए सत्ता पर काबिज लोगों के तख्त को हिलाकर उन्हें बताना है कि हममें भी देश को चलाने और बडे़-बड़े तख्तों को हिलाने की हिम्मत है।